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जिसके लिए सूर्य मात्र एक फल था और 100 योजन समुद्र एक बाथटब | Childhood story of Lord Hanuman



एक भक्त का अपने इष्ट देव के साथ याद किया जाना किसी भी सच्चे भक्त के लिए सबसे बड़ा वरदान है | शायद इस सूची में सबसे ऊपर राम भक्त हनुमान आते हैं | जितना भगवान राम का नाम माता सीता के साथ लिया जाता है उतना ही हनुमान जी भी श्री राम के साथ याद किये जाते हैं | हमारे पौराणिक ग्रंथो में ऐसे न जाने कितने किस्से हैं जो हनुमान जी की बेहद ही नटखट और लुभावने व्यवहार की बातें करते हैं | तो आइये आज हम आपको सुनाते है हनुमान जी के बाल्यकाल की वो कहानी जब उन्होंने सूरज को एक फल समझ खाना चाह था |

कथा : "बाल्य समय रवि भक्ष लियो जब तीनो लोक भयो अंधियारों"

एक समय की बात है जब हनुमान जी अपनी बाल्यावस्था में थे | ये एक ऐसा काल था जब हनुमान जी का अपनी शक्तियों पर वश नहीं था | वो बहुत ही उत्पाती बालकों की श्रेणी में आते थे | उनकी माता अंजना उनके इस व्यवहार से रोज परेशान रहती | एक बार माँ अंजना किसी काम से महल के बाहर थी | काफी समय से बहार होने की वजह से हनुमान जी को किसी ने खाना नहीं खिलाया | भूख से व्याकुल हनुमान बेचैन होकर अपनी अटारी पर आ जाते हैं | वहाँ से वो सूर्य को आकाश में चमकता देखते है | उन्हें वो एक फल जैसा लगता है | वो तुरंत ही उड़ पड़ते सूर्य को निगलने के लिए |


हनुमान को उड़ते देख वायु देव और तेज़ी से बहने लगते है ताकि हनुमान जल्दी से जल्दी सूर्य तक पहुंचे |
हनुमान को अपने पास आते देख सूर्य अपने तेज़ को कम कर लेते है ताकि हनुमान जी जले ना | जिस समय हनुमान सूर्य को निगलने की लिए बढ़ रहे थे उसी समय राहू भी सूर्य देव पर ग्रहण लगाने के लिए बढ़े जा रहा था | हनुमान ने सूर्य देव को निगल लिया ये देखते ही राहू भयभीत होकर इंद्र के पास आया | उसने इंद्र को सारी बात बताई | 

भगवान इंद्र गुस्से में आये और उन्होंने हनुमान जी की ठुड्डी पर वज्र से प्रहार किया | प्रहार के फलस्वरूप सूर्य देव हनुमान जी के मुख से मुक्त हो गए पर हनुमान मूर्छित होकर पर्वत पर जा गिरे | ये देखकर वायुदेव को क्रोध आ गया | उन्होंने धरती पर अपना प्रवाह ही रोक दिया | इस वजह से धरती पर सभी को साँस लेने में परेशानी होने लगी | तब भगवान इंद्र ने वायु देव से विनती की और ब्रह्मा जी ने हनुमान को वापस होश में लाने में मदद की | ये देखकर वायुदेव शांत हुए और पुनः अपने पुराने वेग से बहने लगे | तब इंद्र ने हनुमान को वरदान दिया की इस बालक का शरीर वज्र जितना मजबूत हो जायेगा और इसके शरीर को कोई भी अस्त्र भेद नहीं पायेगा |



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