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क्या कारण है जो हिन्दू नही खाते मंगलवार को मांस ? | Reason behind denial of meat by Hindus on Tuesday



आमतौर पर हमने अपने आस पास ऐसे ढेरों हिन्दू दोस्तों को मंगलवार को मांस खाने से मना करते हुए देखा है | मंगलवार कह लो या गुरुवार या फिर शनिवार इन तीन दिनों में से किसी एक न एक दिन कोई भी हिन्दू मांस खाने से इनकार कर ही देता है पर इनके अलावा किसी भी दिन ये मांस को ना नहीं कह पाते | ये सुनने में थोड़ा पाखंडी होने सा लगता है पर क्या आपको इसके पीछे के कारण का पता है ? तो आइये आपको आज के विशेषांक में पढ़ाते है की कैसे ये मंगलवार को मांस न खाने वाले विचार ने जन्म लिया |


पहले हिन्दू गौमांस खाते थे :

आज से हजारों साल पहले जब हमारे बीच आज के जैसे खेती और कृषि जगत से उत्पन्न अनाज नही हुआ करते थे तब हिन्दू और दुसरे धर्म के लोग भी सिर्फ मांस पर ही अपना जीवन यापन करते थे | इसका लिखित प्रमाण अपस्थम्बा सूत्र में लिखा मिलता है | उस समय लोग गौहत्या करने लगे और गौमांस पर ज्यादा रुझान बढ़ गया | 


चूंकि हिन्दू धर्म में गाय को माता का रूप मन जाता है तो गौ हत्या माँ की हत्या के समान था इसीलिए उस समय में हिन्दू धर्म के मूलतः सिद्धांतों के संरक्षण के लिए जो की ये कहते है की निःशस्त्र और मूक जीवों को मारना उनपर अत्याचार करना मानवता के विरुद्ध है | धर्म को भय की ढल से बचने के लिए ऐसा महाल गढ़ा गया जहाँ मांस खाना एक पाप के समान था | इस वजह से हिन्दुओं ने मांस खाना छोड़ दिया |

तो क्या मंगलवार की दुहाई देके मांस को मना करना अंधविश्वास है ?

अगर आप किसी भी अस्पष्ट और अतार्किक आदमी से बात करेंगे तो वो कहेगा की मांस खाना हमारे शास्त्रों में लिखा है | अगर आपने हिम्मत करके ये पूछ लिया की किस शास्त्र में तो वो आपको टालने लगेगा क्योंकि स्वामी विवेकानंद के अनुसार : 
"अपनी निजी इक्षाओं को पूरा करने के लिए जो लोग शास्त्रों का सहारा लेते हैं उनकी 400 पुश्तों ने भी शास्त्र नहीं देखा होता "


पशुवों पर अत्याचार निश्चित तौर पर गलत और अनर्गल है पर उसकी आड़ में धर्म के नाम पर लोगों में भय का प्रसार करना भी उतना ही गलत है | हिन्दू धर्म सिर्फ ये कहता है की मांस और मदिरापान से संसार की सारी तामसी प्रवित्तियां हमारे अन्दर घर कर लेती है तो इससे बचने के लिए हमें मांस और मदिरापान से बचना चाहिए | अगर कोई मंगलवार आया गुरुवार को भगवान् हनुमान और भगवन बृहस्पति की दुहाई देकर मांस खाने से मना करते हैं तो ये अपने आप में सिर्फ एक अन्धविश्वास है | 


अगली बार से आप अपने निकटम मित्रों, परिजनों को मूक जानवरों पे अत्याचार से बचाए और धर्म के नाम पर फैलाये जाने वाले ऐसे अन्धविश्वास का नाश करें | 



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