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इतिहास वाली खिड़की : बाबर का बेटा हुमायूँ, हुमायूँ का बेटा ? | Life of Akbar at a glance



आपने फिल्मों में देखा होगा की एक मुग़ल सम्राट था जो अपनी प्रजा को लेकर बहुत ही जिंदादिल था, उसकी एक हिन्दू रानी भी थी जिसे वो अपनी बाकी बेगमों से ज्यादा प्यार करता था | वो शेरों से भी लड़ जाता था और बड़े से बड़े राजा की सेना को धूल चटा देता था | सारी प्रजा में उसके प्रति सहानुभूति बांध चुकी थी और वो धीरे धीरे हिन्दुस्तान का सबसे सफल और चहेता राजा बनता जा रहा था | पर बस इतनी सी कहानी नहीं है अकबर-ऐ-आज़म की | वो तो इन छोटे किस्सों से कहीं ज्यादा बड़ा है | तो आइये आपको आज इतिहास वाली खिड़की में बताये अकबर के जीवन को सुलझाती ये रिपोर्ट |

अकबर : जीवन परिचय 

असल नाम      : जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर
पिता का नाम   : हुमायूँ
माता का नाम   : हमीदा बनो बेगम साहिबा
जन्म               : 15 अक्टूबर 1542
मृत्यु               : 27 अक्टूबर 1605
प्रचारित धर्म   : दीन-ऐ-इलाही


पिता की मौत के वक़्त मात्र 13 वर्ष का लड़का दिल्ली की राजगद्दी पर बैठता है | उसकी चुनौती है अपने तख़्त तो बाहर के राजाओं के आक्रमण के साथ साथ अन्दर चल रही कूटनीति से बचाने की | उसका पहला ही घमासान हिन्दू धर्म के एक बड़े ही सशक्त और स्थापित राजा हेमू से | भला एक 13 साल का बच्चा दिल्ली के तख़्त को इतने कड़े प्रतिद्वंदी के मुख से कैसे बचाएगा ? पर इस 13 साल के लड़के ने हेमू को पटक दिया | ऐसी पठखनी
इतिहास में बहुत ही कम राजाओं ने दी है और खायी है |
अपने शासन काल में उसने शक्तिशाली पश्तून वंशज शेरशाह सूरी के आक्रमण बिल्कुल बंद करवा दिये थे |अपने साम्राज्य के गठन करने और उत्तरी और मध्य भारत के सभी क्षेत्रों को एकछत्र अधिकार में लाने में अकबर को दो दशक लग गये थे | उसका प्रभाव लगभग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर था और इस क्षेत्र के एक बड़े भूभाग पर सम्राट के रूप में उसने शासन किया | सम्राट के रूप में अकबर ने शक्तिशाली  हिन्दू राजपूत राजाओं से राजनयिक संबंध बनाये और उनके यहाँ विवाह भी किये |

कैसे बनायी अकबर ने हर किसी के दिल में जगह ?

अकबर के शासन का प्रभाव देश की कला एवं संस्कृति पर भी पड़ा | उसने चित्रकारी आदि ललित कलाओं में काफ़ी रुचि दिखाई और उसके महल की दीवारें सुंदर चित्रों व नमूनों से भरी पड़ी थीं | मुगल चित्रकारी का विकास करने के साथ साथ ही उसने यूरोपीय शैली का भी स्वागत किया। | 


अपने आरंभिक शासन काल में अकबर की हिन्दुओं के प्रति सहिष्णुता नहीं थी, किन्तु समय के साथ-साथ उसने अपने आप को बदला और हिन्दुओं सहित अन्य धर्मों में बहुत रुचि दिखायी। उसने हिन्दू राजपूत राजकुमारियों से वैवाहिक संबंध भी बनाये | अकबर के दरबार में अनेक हिन्दू दरबारी, सैन्य अधिकारी व सामंत थे | उसके मन में इन धार्मिक नेताओं के प्रति आदर भाव था, जिसपर उसकी निजि धार्मिक भावनाओं का किंचित भी प्रभाव नहीं पड़ता था |

मृत्यु :

उसने आगे चलकर एक नये धर्म दीन-ए-इलाही की भी स्थापना की, जिसमें विश्व के सभी प्रधान धर्मों की नीतियों व शिक्षाओं का समावेश था | दुर्भाग्यवश ये धर्म अकबर की मृत्यु के साथ ही समाप्त हो गया |
इतने बड़े सम्राट की मृत्यु होने पर उसकी अंत्येष्टि बिना किसी संस्कार के जल्दी ही कर दी गयी | परम्परानुसार दुर्ग में दीवार तोड़कर एक मार्ग बनवाया गया तथा उसका शव चुपचाप सिकंदरा के मकबरे में दफना दिया गया |



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