Hinduism

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, जहाँ दर्शन करने पर मिलता है अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य | Full Story of Mallikarjuna Jyotirlinga





*यह आर्टिकल राखी सोनी द्वारा लिखा गया है। 

 
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग काफी खूबसूरत ज्योतिर्लिंग में से एक माना जाता है। ये ज्योतिर्लिंग आंध्रप्रदेश में स्थित है।  इसका निर्माण कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर हुआ है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस पर्वत पर पूजा अर्चना करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है। इतना ही नहीं, श्रीशैल के शिखर के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो, अनन्त सुखों की प्राप्ति होती है। इस पर्वत को  दक्षिण का कैलाश  कहा जाता है। महाभारत, शिव पुराण और पद्म पुराण आदि धर्मग्रंथों में इसकी महिमा और महत्ता का विस्तार से वर्णन किया गया है।

ये है कथा :

इस मंदिर का निर्माण क्यों हुआ, इसके पीछे भी हमारे शास्त्रों में एक कहानी का वर्णन किया गया है। बताया जाता है कि जब शिव पुत्र कार्तिकेय और गणेश दोनों विवाह योग्य हुए। दोनों की उम्र समान थी, इसलिए किसी की शादी पहले हो, इसपर विवाद होने लगा। इस समस्या का हल निकालने के लिए शिव-पार्वती ने गणेश जी और कार्तिकेय जी से कहा कि जो इस पृथ्वी की सबसे पहले परिक्रमा पहले करेगा, उस का विवाह पहले किया जाएगा। कार्तिकेय जी तत्काल पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए दौड़ पड़े। स्थूलकाय गणेश जी का अपने वाहन मूषक पर पृथ्वी परिक्रमा असंभव था। अत: बुद्धिदेव गणेश ने माता पार्वती और पिता  शिव को आसन आसीन कर उनकी सात परिक्रमा की और विधिवत् पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया। फलत: गणेश माता-पिता की परिक्रमा कर पृथ्वी की परिक्रमा से प्राप्त होने वाले फल की प्राप्ति के अधिकारी बन गए। उनकी इस चतुराई से भगवान काफी खुश हुए और रिद्धि-सिद्धि से उनका विवाह करा दिया। 





कार्तिकेय सम्पूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके वापस आए। जब उन्हें ये सारी बात पता चली तो उन्हें काफी गुस्सा आया और उन्होंने घर को छोड़ दिया और पार्वती ने कार्तिकेय को मनाने का बहुत प्रयास किया। पर वे वापस नहीं आए। तब दुखी माता पार्वती भगवान शिव को लेकर कार्तिकेय जी को मनाने के लिए क्रौंच पर्वत पर गई। तब भगवान शिव इस पर्वत पर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और मल्लिकार्जुन  ज्योतिर्लिंग के नाम से जाने गए। मल्लिका, माता पार्वती का नाम है और भगवान शंकर को अर्जुन कहा जाता है। अत: इसे मल्लिकार्जुन  ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। 

एक अन्य कथा :

 
 
इस मंदिर के निर्माण के बारे में एक अन्य कथी भी है।  बताया जाता है कि शैल पर्वत के निकट किसी समय राजा चंद्रगुप्त की राजधानी थी। उनकी एक पुत्री आश्रम से निकलकर इस पर्वत पर गोपों के साथ रहने लगी। उस कन्या के पास एक बड़ी ही शुभ लक्षणा सुंदर श्यामा गाय थी। उसका दूध रात में कोई दुह ले जाता था। एक दिन संयोगवश उस राज कन्या ने चोर को दूध दोहते देख लिया और गुस्से में उस चोर की ओर दौड़ी, लेकिन गाय के पास पहुंचकर उसने देखा कि वहां शिवलिंग के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। राजकुमारी ने  कुछ समय बाद इस जगह मंदिर का निर्माण कराया, जिसका नाम मल्लिका ज्योतिर्लिंग रखा गया।



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