Hinduism

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से मिलती है पापों से मुक्ति | Full story of Somnath Jyotirlinga



*यह आर्टिकल राखी सोनी द्वारा लिखा गया है। 

 
 
अगर आप अपने पापों से मुक्ति पाना चाहते हैं तो महादेव के 12 ज्योतिर्लिंग का नाम लीजिए। शास्त्रों के अनुसार जहां-जहां भगवान शिव खुद प्रकट हुए थे, वहां पर शिवजी को ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। देशभर में 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं। ऐसा कहा जाता है जो भक्त सुबह- शाम इन ज्योतिर्लिंग का स्मरण करता है, वे अपने सभी पापों से मुक्ति पा लेता है।  १२ ज्योतिर्लिंग में सबसे पहले सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का नाम सबसे पहले आता है।  कहा जाता है कि ये भारत का नहीं, बल्कि पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग है। इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था। इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है। इसे अब तक 17 बार नष्ट किया गया है और हर बार इसका पुनर्निमाण किया गया।

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया निर्माण :


सोमनाथ मंदिर गुजरात में स्थित है। सबसे पहले इस मंदिर का निर्माण किसने कराया, इसके बारे में कोई खास जानकारी नहीं है, लेकिन इतिहास के समय इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई थी। इस मंदिर पर काफी चढ़ावा आने लगा था। तब कई बार मुगल शासकों ने इस मंदिर पर आक्रामक किया और मंदिर को तोड़कर सारी सम्पति को अपने कब्जे में कर लिया। कई बार इस मंदिर को हिन्दू शासक और मुगल शासकों ने तोड़ा। आजादी के बाद इस मंदिर का निर्माण सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया। 

कुछ खास बातें :

यहां श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। ये मंदिर सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी फेमस हैं। हर साल यहां करीब एक करोड़ लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के पास ही तीन नदियां हिरण, कपिल और सरस्वति भी बहती है।


यहां हर रात लाइट एंड साउथ शो भी होता है, जिसमें मंदिर के बारे में बड़ी ही खूबसूरती से बताया जाता है।
यहां श्रीकृष्ण कस बड़ा ही सुंदर मंदिर भी बना हुआ है। बताया जाता है।  श्रीकृष्ण भालुका तीर्थ पर विश्राम कर रहे थे। तब ही शिकारी ने उनके पैर के तलुए में पद्मचिह्न को हिरण की आंख जानकर धोखे में तीर मारा था। तब ही कृष्ण ने देह त्यागकर यहीं से वैकुंठ गमन किया।

यह हैं कथा :


इस मंदिर का निर्माण स्वयं चंद्रदेव ने किया था। इसके पीछे एक रोचक कथा भी है। शास्त्रों के अनुसार  सोम अर्थात् चंद्र ने, दक्षप्रजापति राजा की 27 कन्याओं से विवाह किया था, लेकिन उनमें से रोहिणी नामक अपनी पत्नी को वे सबसे ज्यादा प्यार करते थे, इस वजह से प्रजापति की अन्य कन्याएं काफी दुखी थी। बेटियों को दुखी देखकर प्रजापति ने एक दिन चंद्रदेव को शाप दे दिया कि अब से हर दिन तुम्हारा तेज  कम होता जाएगा। फलस्वरूप हर दूसरे दिन चंद्र का तेज घटने लगा। शाप से  परेशान सोम ने भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी। अंतत: शिव प्रसन्न हुए और सोम-चंद्र के श्राप का निवारण किया। सोम के कष्ट को दूर करने वाले प्रभु शिव का स्थापना यहां की गई,जिसका नाम सोमनाथ रखा है।



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