किस राक्षस से डरकर गुफा में छिपना पड़ गया भगवान् श्रीकृष्ण को ! Which of the demons was scared of Lord Krishna in the cave?



किस राक्षस से डरकर गुफा में छिपना पड़ गया भगवान् श्रीकृष्ण को :


दोस्तों आपने भगवान् श्री कृष्ण के बारे में अनेक कहानियाँ सुनी होंगी लेकिन क्या आपको भगवान् श्रीकृष्ण से जुडी एक ऐसी कहानी के बारे में पता है जिसमें एक राक्षस के डर से स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण को एक गुफा में शरण लेनी पड़ी थी ! जी हाँ हम आज आपको ऐसी ही कहानी के बारे में बतान जा रहे हैं !

कालयवन राक्षस के साथ श्री कृष्ण का युद्ध :-

एक बार श्रीकृष्ण और कालयवन नाम के राक्षस के साथ भगवान् श्रीकृष्ण का भयंकर युद्ध हो रहा था ! लेकिन कालयवन बहुत ही शक्तिशाली और मायावी शक्तियों से पूर्ण तो था ही साथ ही उसे एक ऐसा वरदान वरदान प्राप्त कर लिया था जिस वजह से भगवान् श्रीकृष्ण भी उसे हरा नहीं पा रहे थे ! कालयवन राक्षस को भगवान् शंकर से यह वरदान प्राप्त था की युद्ध में किसी भी प्रकार के अस्त्र व शस्त्र से उसकी मृत्यु नहीं होगी ! 


श्रीकृष्ण का युद्धभूमि से भागकर गुफा में छिपना :-

तभी श्रीकृष्ण ने उसे पराजित करने की एक उक्ति निकाली ! उन्होंने एक अलग युद्ध के मैदान में बलराम को उसकी सेना के साथ युद्ध करने को भेजा तथा स्वय सीधे कालयवन के सामने जाकर उसे युद्ध में कुछ देर तक उलझाने के बाद अचानक भागने लगे और एक गुफा के अंदर जाकर छिप गए ! श्रीकृष्ण को भागता देखकर राक्षस कालयवन भी उसी गुफा में आ गया ! लेकिन गुफा में काफी खोजने  के बाद भी श्रीकृष्ण भगवान् को नहीं ढूंढ पाया ! इधर बलराम से कालयवन की सेना का युद्ध चल रहा  तो कालयवन को युद्धभूमि में ना पाकर उसकी सेना ने उसे मृत समझ लिया और सेना  भाग खड़ी हुई ! 

गुफा में कालयवन का भस्म हो जाना :-

इधर गुफा में कालयवन को उस गुफा में श्री कृष्ण तो नहीं मिले लेकिन वहाँ पर पीताम्बर वस्त्र ओढ़े हुए एक व्यक्ति निद्रा में आराम करते हुए मिला तो उसने उस उस व्यक्ति को भगवान् श्रीकृष्ण समझते हुए उस पर जोरदार हमला  कर दिया जिससे उस व्यक्ति की नींद खुल गयी और कालयवन को अपने सम्मुख पाकर तुरंत ही उस व्यक्ति की आँखों से अग्निज्वाला निकल पड़ी और कालयवन राक्षस उसी अग्निज्वाला से भस्म हो गया!

महाराज मुचकुन्द का भगवान् से मिलकर उद्धार होना:-

और यह सब घटना उस गुफा में एक खम्बे की ओट से भगवान् श्रीकृष्ण देख रहे थे! और तभी उन्होंने उस व्यक्ति को बधाई दी! दरअसल वह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि महाराज मुचकुंद थे जिन्होंने त्रेता युग में देवासुर संग्राम में देवताओ की बड़ी मदद की थी मदद के कारण ही देवताओं ने उन्हें देवों के एक कल्प की आयु प्रदान की थी ! देवताओं ने उन्हें यह वरदान दिया था की वे अपना शेष जीवन सोकर ही बिताएंगे और यदि उनकी नींद में कोई भी बाधा पंहुचाएगा वह व्यक्ति उनके प्रथम दृष्टिपात से ही भस्म हो जायगा ! और बाद में उन्हें नारायण के दर्शन भी होंगे  जिससे उनके जीवन का उद्धार हो जायेगा !





  



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