Hinduism

जिसके त्रिशूल की नोक पर है काशी उसे अपने पैरों के नीचे दबाया था माँ काली ने | Why Goddess Kali put her feet on Lord Shiva



कौन है माँ काली ?

माँ दुर्गा के १० महा रूपों में से एक है माँ काली | माँ काली दरअसल माँ दुर्गा का गुस्सैल और डरावना रूप है | अगर माँ काली के भौतिक रूप की विवेचना की जाय तो क्रोध उनका पहला आभूषण है, उनकी रक्तरंजित लाल आँखे जो एक बार भय को भी देख ले तो भय उनसे भय खा जाये | गले में 52 कटे मस्तकों की माला और हाथ में खडग और खप्पर लिए माँ काली का जन्म ही दैत्य और अराधम प्राणियों के नाश के लिए हुआ है | पर एक बार की कहानी ऐसी भी है जब माँ कलि का क्रोध आपे से बाहर हो गया था | तो आइये जाने आज उसी किस्से के बारे में |

कौन था रक्तबीज ? :

मार्कंडेयपुराण के अनुसार आज से हजारों वर्ष पूर्व धरती पर एक असुर हुआ करता था जिसका नाम था रक्तबीज | रक्तबीज ने भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और उनसे ये वरदान माँगा की वो उसे अमर कर दें | भगवान ब्रह्मा ने उसे ऐसा वरदान देने से मना कर दिया पर इसके बदले में उन्होंने रक्तबीज को ये वरदान दिया की जब भी रक्तबीज किसी से युद्ध करेगा और उस युद्ध में अगर उसके तन से एक भी रक्त की बूँद धरती पर गिरेगी तो उससे एक नया रक्तबीज जन्म ले लेगा |
इस शक्तिशाली वरदान की वजह से रक्तबीज ने अनगिनत युद्ध जीते और धरती पर उसका दुराचार धीरे धीरे बढ़ता गया | रक्तबीज के बढ़ते उत्पात को ख़त्म करने के लिए सभी देवताओं ने मिलकर उसपर आक्रमण कर दिया पर उसके वरदान के आगे वो भी हार गए |

रक्तबीज वध कथा :

हारे हुए देवता माँ दुर्गा के पास सहायता मांगने पहुचे | माँ दुर्गा ने तब अपने सबसे प्रचंड स्वरूप माँ काली का रूप लिया और वो निकल पड़ी रक्तबीज का वध करने | रक्तबीज को सामने पा के माँ काली अपने रौद्र रूप में आ गयी | उन्होंने उसपर सीधा वार शुरू किया पर रक्त की हर एक बूँद के साथ एक नया रक्तबीज पैदा हो जाता था | ये देख कर माँ काली और भी रुष्ट हो गयी | तब उन्होंने अपनी जीभ का विस्तार किया और रक्तबीज के शरीर से गिर रही हर एक बूँद को वो सीधे अपने अन्दर लेने लगी | देखते ही देखते उन्होंने रक्तबीज का वध कर दिया | पर अब वो बहुत ही क्रोधित हो गयी थी | वो किसी के भी समझाने से रुक ही नहीं रही थी | तब भगवान शंकर उन्हें समझाने आये | वो उनकी भी बात नहीं सुन रही थी | 



तब भगवान् शंकर उनके सामने लेट गए | जब माँ काली ने उनके ऊपर पैर रखा तो वो थोड़ी ठिठकी और तत्पश्चात उनका गुस्सा भी शांत हो गया | इस प्रकार उन्होंने सारी धरती के रक्षक भगवान् शंकर के ऊपर पैर रख दिया |



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