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विद्यार्थियों को क्यों कहा जाता है भगवान गणेश के इन 12 नामों को पढ़ने के लिये ? | The 12 names of Lord Ganesh



भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक का देवता कहा गया है। उनके पास हर प्रकार की सिद्धि और निधि का ज्ञान है। अगर कोई भी उनको अपना ईष्ट देव मान कर श्रद्धापूर्वक पूजन करे तो इस ज्ञान रस का स्वाद उसे भी चखने को मिलता  है। आमतौर पर शिक्षा-दीक्षा का नाम आते ही विद्यार्थियों का वर्ग ही सबसे पहले हमारे ज़ेहन में कौंधता है।  इसलिये प्राइमरी स्कूल से लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज के गेट तक आते-आते हर मोड़ पर मम्मी के मुँह से इस मंत्र का पाठ करने के लिये सुनना पड़ता है। तो आइये आज आपको पढ़वाते हैं भगवान् गणेश की द्वादस नामावली।



: संकटनाशनगणेशस्त्रोत्रम :

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायु:कामार्थसिद्धये ।।१ ।।

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।।
तृतीयं कृष्णपिङ्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ।।२ ।।

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ।।३ ।।

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ।।४ ।।

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर: ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ।।५ ।।

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ।।६ ।।

जपेत् गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ।।७ ।।

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्पयेत् ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ।।८ ।।



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