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जगन्नाथ पुरी जाये बिना ही जानिये वहाँ के 4 रोचक तथ्य | 4 amazing facts about Jagannath Puri



*यह आर्टिकल राखी सोनी द्वारा लिखा गया है।



श्रीकृष्ण के हमारे देश में कई खूबसूरत और अनोखे मंदिर स्थापित हैं। इन सबमें सबसे खास और खूबसूरत मंदिर जगन्नाथ मंदिर को माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि यहां श्रीकृष्ण स्वयं निवास करते हैं। इस मंदिर को जगन्नाथ मंदिर क्यों कहा जाता है, इसके पीछे भी एक मुख्य वजह है। दरअसल जगन्नाथ शब्द का मतलब होता है संपूर्ण जगत का मालिक और इसी कारणवश भगवान कृष्ण को जगन्नाथ स्वामी के नाम से जाना जाता है।  इस मंदिर में स्थापित भगवान जगन्नाथ का अनोखा रूप कहीं अन्य देखने को नहीं मिलता है। वैसे इस मंदिर से जुड़े कई रोचक तथ्य भी है, जिसके बारे में आज हम हमने लेख के जरिए बताने जा रहे हैं।

नहीं गुजरते हैं पक्षी :


इस मंदिर के ऊपर एक लाल ध्वज है, जो हमेशा विपरीत दिशा में ही लहराता है। इतना ही नहीं इस जगह आप कहीं भी हो, लेकिन मंदिर के ऊपर लगा सुदर्शन चक्र हमेशा सामने ही नजर आता है। ये चक्र अष्टधातु से बना हुआ है। वैसे मंदिर की गुबंद पर अक्सर पक्षी बैठे हुए नजर आते हैं, लेकिन आश्चर्य की बात है कि इस मंदिर की गुबंद पर कभी भी कोई पक्षी बैठा हुआ नजर नहीं आता है। इतना ही नहीं मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी गुजरता भी नहीं है।

लाखों लोगों के लिए बनता है भोजन :


इस मन्दिर का रसोई घर दुनिया का सबसे बड़ा रसोइ घर है।  भगवान जगन्नाथ को चढ़ाने वाले महाप्रसाद को बनाने 500 रसोईये एवं 300 उनके सहयोगी काम करते है। मंदिर में हर दिन हजारों तो कभी कभी लाखों लोग भोजन करते हैं, लेकिन कभी भी भंडारा में कमी नहीं आती है। विशेष बात तो यह है कि हर साल एक ही मात्रा में भोजन बनाया जाता है और कभी भी खाना न बर्बाद होता है न ही कम पड़ता है। 7 बर्तनों को कर्मानुसार ऊपर निचे रखकर प्रसाद निर्मित होता है और  ऊपर से नीचे रखे बर्तनों में सबसे पहले भोजन ऊपर रखे बर्तन में पकता है।

हर रोज बदल जाता है झंडा :


4 लाख वर्गफुट में बना यह मंदिर 214 मीटर ऊंचा है। आश्चर्य की बात है कि दिन के किसी भी समय मंदिर के गुंबद की छाया नही बनती। ऐसा कहा जाता है कि एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदलता है। ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो जाएगा।  सिंहद्वार में प्रवेश करने पर सागर की लहरों की आवाज को नहीं सुन सकते। लेकिन कदम भर बाहर आते ही लहरों की तेज आवाज आने लगती है।

हनुमानजी करते हैं रक्षा :


बताया जाता है कि जगन्नाथ जी के मंदिर को समुद्र ने बार तोड़ था। इसके बाद भगवान जगन्नाथ ने समुद्र को नियंत्रण में करने के लिए वीर हनुमान जी को मंदिर के बाहर खड़ा कर दिया था। हनुमान जी खुद को भगवान् के दर्शनों के लिए रोक नही पाते थे। जब भी हनुमान जी दर्शनों के लिए मंदिर जाते, तब समुन्दर मंदिर  में घुस जाता है। जब भगवान को ये बात पता चली तो उन्होंने  वीर हनुमान जी को उनके नियुक्त जगह पर सोने की बेडियो में बांध दिया। आज भी समुद्र तट पर बेडियो में जकड़े हनुमान जी का मंदिर है।



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