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अगर ये वीर लड़ता तो 1 दिन में ही ख़त्म हो जाता महाभारत का युद्ध | The unsung Hero from Mahabharta



महाभारत का युद्ध मानव सभ्यता का सबसे बड़ा युद्ध था | इससे ज्यादा नरसंहार आज तक किसी भी युद्ध में नहीं हुआ था | ना जाने कितने ही वीर इस युद्ध की बलि चढ़ गए | भीष्म, द्रोणाचार्य, कर्ण, दुर्योधन और ना जाने ही कितने ऐसे अनगिनत वीर हैं जिन्होंने अपनी अपनी सेना को विजय दिलाने कजे लिए अपने प्राणों का भी मोह नहीं किया | निश्चित तौर पर आपने अर्जुन, और कर्ण सरीखे योद्धाओं का नाम तो सुना होगा पर आज हम आपको उस योद्धा का  नाम बताते है जो अपार वीरता का प्रदर्शन करने के बाद भी गुमनाम रहा |

बर्बरीक : वो योद्धा जो कभी न लड़ा !

महाभारत का पूरा युद्ध कोई पर्वत की चोटी पर बैठ कर देख रहा था | अगर ये योद्धा महाभारत का युद्ध लड़ता तो निश्चित तौर पर पांडवों या कौरवों में से किसी न किसी को भरी हानी का सामना करना पड़ता | इस वीर का नाम था बर्बरीक | बर्बरीक महाबलशाली भीम का पोता और घटोतकच्छ का पुत्र था | बर्बरीक को भगवान् शिव से वरदान प्राप्त था की अगर वो चाहे तो भगवान् शिव द्वारा दिए गए 3 दिव्य तीरों से किसी का भी वध कर सकता है | इसके अलावा अग्नि देव द्वारा उसे एक धनुष भी प्राप्त था जिसपे बाण साधने के बाद उसका निशाना कभी गलत जगह लग ही नहीं सकता था | भगवान् कृष्ण को इस बात का पता चला और उन्हें इस बात का आभास भी हो गया की बर्बरीक अगर पांडवों के विरुद्ध लड़ गया तो वो निश्चय ही किसी न किसी पांडव का वध कर देगा और भगवान कृष्ण चाह कर भी उसे नहीं रोक पायेंगे |


इस समस्या के समाधान के लिए उन्हें एक युक्ति सूझी | बर्बरीक ने बहुत पहले अपनी माँ को ये वचन दिया था की पांडवों और कौरवों में से जिसका दल कमज़ोर होगा वो उसी दल को चुनेगा | प्रभु श्री कृष्ण ने उसके सामने एक पहेली खेली और बर्बरीक से पूछा की वो दोनों में से किस दल को चुनेगा | 
बर्बरीक ने कहा की 
"आप तो ईश्वर है और आप पांडवों के साथ है तो इसका अर्थ है कौरवों का दल कमज़ोर है तो मै उनके दल की तरफ से लडूंगा" | 
इसपर भगवान् कृष्ण ने उत्तर दिया की 
"कौरवों का दल तब तक कमज़ोर है जब तक तुम उनके दल से नहीं जुड़े हो | जैसे ही तुम कौरवों के दल में जाओगे वैसे ही पांडवों का दल कमज़ोर हो जायेगा "


इस तर्क के आगे बर्बरीक अनुत्तर रह गया |अब वो भगवान की लीला में फस गया | अब अगर वो जिस किसी दल से भी लड़ता तो दूसरा दल कमज़ोर हो जाता |इस दुविधा के निदान के लिए भगवान् कृष्ण ने बर्बरीक से उसका मस्तक मांग लिया | दोनों दल तभी बराबरी पे रह सकते है जब बर्बरीक अपने प्राण दे दे | ये सुनते ही बर्बरीक ने अपना सिर भगवान् कृष्ण को समर्पित कर दिया और उनसे ये वचन माँगा की भगवान् उसका मस्तक ऐसी जगह रखें जहाँ से सारा महाभारत का युद्ध दिखाई दे | भगवान् ने उसकी इक्षा पूरी की और उसका सिर पर्वत पर रख दिया | वहाँ से बर्बरीक ने पूरा युद्ध देखा |




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