Hinduism

शनि शिंगणापुर : वो गाँव जहाँ दरवाजों पर ताले नहीं लगते | Brief story about Shani Shingnapur



शनि देव को लेकर जितने भ्रम और डर हमने अपने मन में पाले हैं शनि देव वैसे बिलकुल भी नहीं हैं | हिन्दुस्तान में शनि देव के सिर्फ 2 बड़े मंदिर है जहाँ उनकी भव्य रूप से पूजा अर्चना की जाती है | एक मंदिर तो उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में है जबकि दूसरा महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के शिंगणापुर गाँव में है | शायद इस गाँव का नाम आपके लिए नया नहीं होगा क्योंकि इस गाँव की कुछ ऐसी ख़ास बातें हैं जिसकी वजह से ये गाँव हमेशा ही सुर्ख़ियों में रहा है | तो आइये आज आपको बताते है उस गाँव के बारे में जिसके रखवाले हैं शनि देव |

कैसे आये शनि देव शिंगणापुर ?

शनि मराहाज के शिंगणापुर पहुंचने की कहानी बड़ी ही रोचक है। सदियों पहले शिंगणापुर में खूब वर्षा हुई। वर्षा के कारण यहां बाढ़ की स्थिति आ गई। लोगों को वर्षा प्रलय के समान लगने लग रही थी। इसी बीच एक रात शनि महाराज एक गांववासी के सपने में आए।


शनि महाराज ने कहा कि मैं पानस नाले में विग्रह रूप में मौजूद हूं। मेरे विग्रह को उठाकर गांव में लाकर स्थापित करो। सुबह इस व्यक्ति ने गांव वालों को यह बात बताई। सभी लोग पानस नाले पर गए और वहां मौजूद शनि का विग्रह देखकर सभी हैरान रह गये।गांव वाले मिलकर उस विग्रह का उठाने लगे लेकिन विग्रह हिला तक नहीं, सभी हारकर वापस लौट आए। शनि महाराज फिर उस रात उसी व्यक्ति के सपने में आये और बताया कि कोई मामा भांजा मिलकर मुझे उठाएं तो ही मैं उस स्थान से उठूंगा। मुझे उस बैलगाड़ी में बैठाकर लाना जिसमें लगे बैल भी मामा-भांजा हों।

अगले दिन उस व्यक्ति ने जब यह बात बताई तब एक मामा भांजे ने मिलकर विग्रह को उठाया। बैलगाड़ी पर बिठाकर शनि महाराज को गांव में लाया गया और उस स्थान पर स्थापित किया जहां वर्तमान में शनि विग्रह मौजूद है। इस विग्रह की स्थापना के बाद गांव की समृद्घि और खुशहाली बढ़ने लगी।  



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