Hinduism

इतने चढ़ावे के बाद भी भगवान विष्णु हैं क़र्ज़ में | The full stoy about Tirupati Balaji Temple



तो कितना चढ़ावा आता है तिरुपति बालाजी में ? 

तिरुपति बालाजी दुनिया के सबसे अमीर भगवानों में से हैं | एक आंकड़े के मुताबिक तिरुपति बालाजी दरबार की सालाना कमाई करीब 2262 करोड़ रुपए है | तिरुपति बालाजी भगवान के पास कुल संपत्ति है करीब एक लाख 30 हजार करोड़ की | भगवान वेंकटेश्वर के पास फिलहाल करीब 4200 एकड़ जमीन है | करीब 60 हजार करोड़ का सोना-चांदी है | करीब 8500 करोड़ के फिक्सड डिपॉजिट्स हैं और तकरीबन 18 हजार करोड़ की अन्य संपत्तियां हैं |

इन सभी के बाद भी भगवान तिरुपति कर्ज में हैं | तिरुपति बालाजी दुनिया का इकलौता मंदिर है, जिसका ऑनलाइन बैंक एकाउंट है | ताकि भक्त ऑनलाइन पेमेंट के जरिए दान दे सकें | मंदिर का अपना डीमैट एकाउंट है, ताकि भक्त आसानी से शेयर और सिक्योरिटी दान दे पाएं |


कहा जाता है कि अगर आप भगवान वेंकटेश्वर का कर्ज उतारने में उनकी मदद करेंगे, अगर भगवान को दान देंगे तो बदले में लक्ष्मी अपने भक्तों को कई गुना दौलत देंगी | मगर सवाल ये है कि जब समुद्र मंथन के बाद देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से शादी की थी तो फिर भगवान विष्णु को दोबारा लक्ष्मी से शादी करने की जरूरत क्यों पड़ी | वैसे इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है |

लघु कथा :

बात उस वक्त की है, जब बेहतर ब्रह्मांड की खातिर ऋषि मुनियों ने एक यज्ञ शुरु किया था | लेकिन सवाल ये था कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में उस यज्ञ का पुरोहित किसे बनाया जाए | सभी ऋषि मुनियों ने ये जिम्मेदारी भृगु ऋषि को सौंपी क्योंकि वही देवताओं की परीक्षा लेने का साहस कर सकते थे | भृगु ऋषि भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे | लेकिन भगवान ब्रह्मा वीणा की धुन में लीन थे | उन्होंने भृगु ऋषि की तरफ ध्यान ही नहीं दिया, जिससे नाराज होकर भृगु ऋषि ने भगवान ब्रह्मा को श्राप दिया कि धरती पर कोई उनकी पूजा नहीं करेगा | भृगु ऋषि की अगली मंजिल थी महादेव का दरबार, लेकिन उस वक्त भगवान शंकर भी मां पार्वती से बातचीत में खोए हुए थे और उनकी नजर भी भृगु ऋषि पर नहीं पड़ी | ऋषि भृगु फिर नाराज हुए और भगवान शंकर को ये श्राप दिया कि इस संसार के किसी मंदिर में उनकी मूर्ति नहीं लगाई जाएगी |


अब बारी थी भगवान विष्णु की, जो उस वक्त आराम कर रहे थे | भृगु ऋषि ने बैकुंठ धाम में भगवान विष्णु को कई आवाजें दीं | लेकिन भगवान ने कोई जवाब नहीं दिया | गुस्से में आकर भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु के सीने पर पैरों से प्रहार किया |ऋषि भृगु ये बात भूल गए कि भगवान विष्णु के सीने पर देवी लक्ष्मी का वास है | उस हरकत के बाद भगवान विष्णु ने ऋषि भृगु को माफ कर दिया | लेकिन देवी लक्ष्मी रुठ गईं और नाराज होकर बैकुंठ धाम छोड़कर चली गईं |


पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान विष्णु से नाराज होकर देवी लक्ष्मी धरती पर आ गईं और लक्ष्मी के बिना भगवान विष्णु कंगाल हो गए मां लक्ष्मी को ढूंढते हुए भगवान विष्णु भी धरती पर आए | उन्होंने खाना-पीना सबकुछ त्याग दिया | लेकिन ये सबकुछ भगवान ब्रह्मा और शिव को बर्दाश्त नहीं हुआ | लिहाजा उन दोनों ने गाय और बछड़े का रूप धारण किया और भगवान विष्णु की मदद करने पहुंचे | ये गाय चोल वंश के राजा के पास थी | लेकिन एक रोज उस गाय ने दूध देना बंद कर दिया | पौराणिक कहानियों के मुताबिक वो गाय एक पहाड़ी पर जाकर अपना सारा दूध भगवान विष्णु को पिला देती थी |


गाय के दूध न देने पर रानी का गुस्सा फूट पड़ा | उसने एक संतरी को गाय पर नजर रखने को कहा | संतरी ने सबकुछ देख लिया और गुस्से में आकर उसने गाय की तरफ कुल्हाडी फेंकी | लेकिन तभी भगवान विष्णु प्रकट हुए और वो कुल्हाडी उनकी माथे पर लगी | कुल्हाड़ी से लगी उस चोट का निशान आज भी भगवान वेंकटेश्वर की मूर्तियों में कायम हैं | कहते हैं इसीलिए तिरुपति बालाजी में मौजूद मूर्ति में भगवान का सिर ढका है | आज भी हर शुक्रवार को बाकायदा मरहम के जरिए भगवान का उपचार करने की परम्मरा कायम है |


संतरी की इस करतूत पर भगवान विष्णु ने राजा को श्राप दिया | लेकिन माफी मांगने के बाद भगवान ने राजा को माफ भी कर दिया और एक वरदान दिया कि अगले जनम में अकसा के राजा के रूप में पैदा होगा | उसकी एक पुत्री होगी, जिसका नाम होगा पद्मावती और राजा को पद्मावती की शादी, वेंकटेश्वर से करानी होगी | राजकुमारी पद्मावती से शादी करना भगवान वेंकटेश्वर के लिए आसान नहीं था | ये शादी भगवान विष्णु को कर्जदार बना गई | अगर आप तिरुपति बाला जी की मूर्ति को ध्यान से देंखें, तो उस पौराणिक कहानियों से जुड़े कई सच सामने आते हैं |



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