Hinduism

इंद्र हैं तो देवराज पर कभी क्यों नहीं होती उनकी पूजा ? | Why is lord Indra never worshiped ?



आपने, हमने, हम सब ने टी.वी पर जितने भी धार्मिक कार्यक्रम देखे होंगे उन सभी चलचित्रों में हम एक ऐसा किरदार देखते थे जो पहले आने दंभ और ऐंठ में रहता था, किसी को भी कुछ नहीं समझता था पर कार्यक्रम के बीच में ही कोई असुर इनकी सिट्टी पिट्टी गुम कर देता था और ये त्राहिमाम, त्राहिमाम करते हुए तीनों लोकों के द्वार पर मदद की गुहार लिए दौड़ते रहते थे |

जी हाँ अब तक तो आप समझ ही गए होंगे की हमारा ईशारा देवराज इंद्र की तरफ है | तो आइये आपको हम एक ऐसी कथा सुनाते हैं जो हमें उस श्राप के बारे में बताएगी जिसकी वजह से देवराज इंद्र की कभी पूजा नहीं हुई |

लघु कथा :

एक समय की बात है धरती पर एक गौतम ऋषि हुआ करते थे | अत्यंत ही ज्ञानी और योगी पुरुष | वो नगर के शोर शराबे से दूर जंगल में ध्यान करते थे | उनकी एक पत्नी थी जिनका नाम अहिल्या था | अहिल्या एक अत्यंत ही सुन्दर और पुर्णतः पतिव्रता स्त्री थी | एक तपस्विनी के रूप में भी उनका चेहर इतना ओजमान रहता था की कोई भी उनकी सुंदरता पर मोहित हो जाता था |

एक बार देवराज इंद्र गौतम ऋषि की कुटिया के पास से गुजरे तब वहां उन्होंने अहिल्या को गौतम ऋषि की सेवा करते देखा | देखते ही एक क्षण में ही वो उनपर मोहित हो गए | धरती से वापस स्वर्ग लौटने के बाद भी इंद्र का मन अहिल्या पर ही अटका रहा | इंद्र के मन में अहिल्या को आलिंगनबद्ध करने की इक्षा इतनी बलवती हो उठी की उन्होंने एक कुटिल षड़यंत्र बनाया | हमेशा भोर के समय गौतम ऋषि धयन और योग के लिए जंगल में चले जाते थे |


उस समय अहिल्या कुटिया में अकेले रह जाती थीं | ठीक उसी समय देवराज इंद्र गौतम ऋषि का रूप धर कर कुटिया में आ जाते है | अहिल्या इंद्र का बहरूपिया रूप समझ नहीं पायी और उन्हें अपना पति समझ कर उनकी सेवा करने लगी |जब वापस गौतम ऋषि अपने आश्रम में आये तो उन्होंने अहिल्या को किसी बहरूपिये के साथ देखा | ये देखते ही वो क्रोधित हो गए |

क्रोध के आवेश में आकर ऋषि ने देवराज इंद्र को श्राप दिया की जिस स्त्री की योनी के लिए वो इतना आसक्त रहता है वैसी ही १००० योनिया तुम्हारे शरीर पर निकल जाएँ और देवताओं के राजा होने के बाद भी तुम्हारी पूजा अन्य देवताओं की तुलना न के बराबर हो | ऐसा सुनते ही इंद्र ने ऋषि के पैर पकड़ लिए और गिड़गिड़ाने लगा | गौतम जी को उस पर दया आ गयी और उन्होंने इंद्रा के शरीर पर उभर आई योनियों को आँखों में परिवर्तित कर दिया |


पर उन्होंने अहिल्या को पत्थर की नारी बना दिया और ये कहा की वो सिर्फ श्री राम के स्पर्श मात्र से ही वापस नारी का रूप पा सकेगी | आगे चलकर ऐसा ही हुआ और प्रभु श्री राम के स्पर्श से अहिल्या की मुक्ति हुई |



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