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जब मोहल्ले के लड़के 26 जनवरी की प्रभातफेरी लगा रहे थे तब मै दांतों के बीच तीली दबा के बच्चन बन रहा था | 26th January special



Flashback :


किस्सा तब का है जब नाखून पर सफ़ेद चकत्ते पड़ा करते थे, आँखों के नीचे झांई नहीं थी, बाल रणबीर या शाहरुख़ कट ना काटकर जब सिर्फ मीडियम कट में कटते थे और इंतज़ार के नाम पे एक बक्सा भर के वक़्त था | तब कुछ ख़ास तारीखें कैलेंडर पर छपे छोटे-छोटे चौकोर खानों से झांकती थी, रिझाती थी, कुछ एक तो रुलाती भी थी | उन्ही तारीखों के गुच्छे में एक पत्ता 26 जनवरी का था |

"अन्न जहाँ का 
हमने खाया,
वस्त्र जहाँ का 
हमने पहना, 
नीर जहाँ का 
हमने पीया,
उस देश की रक्षा कौन करेगा ?
हम करेंगे, हम करेंगे, हम करेंगे !
कैसे करेंगे ?
तन से करेंगे !,मन से करेंगे !,धन से करेंगे !"


स्कूल में 26 जनवरी की तैयारियाँ गुड़िया दी की शादी की तैयारी बराबर चल रही थी | पांडे सर ने स्कूल के सभी कड़क लड़कों को स्लोगन बिलकुल बन्ना गीत जैसे रटवा दिया था और हर क्लास की सुन्दर लड़की को सरस्वती वंदना गाने के लिये चुन लिया गया था | जो लड़के गलती से कड़क ना होकर खूबसूरत निकल जाते थे और लड़की सुन्दर न होकर सुरीला गाती थी उन बेचारों को दुबे सर के लिखे नाटक में भीड़ बनने का काम मिल जाता था | हमारा हीरो भी लगातार 4 साल से भीड़ बन रहा था | हर साल जो नए लोग भीड़ बनने आते थे उन्हें अपने हीरो से ट्रेनिंग मिलती थी | पर अपने हीरो को तो हीरो बनना था, एकदम बच्चन माफ़िक |

"मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बैलेंस है, क्या है तुम्हारे पास ?"

दुबे सर को कैसे समझाऊ ? बस यूँ मान लो अगर प्रीतम दा म्यूजिक compose (चुरा के decompose) करने के बजाय नाटक लिखते तो दुबे सर बन जाते | हांलांकि ये लिखते हुए मुझे बहुत डर लग रहा है की अगर दुबे सर या फिर प्रीतम दा में से किसी ने भी इसे पढ़ लिया, तो मेरी पिटाई हो जायेगी |  खैर, दुबे सर ने इस बार कहानी लिखी 'देश की दीवार ' |


ये बच्चन, शशि कपूर और निरूपा रॉय वाली दीवार का देशभक्ति वर्जन था | कविता मैम, जिनके सब्जेक्ट में अपने हीरो के नंबर हमेशा सही आते थे, ने बच्चन के रोले के लिये अपने हीरो की कास्टिंग कर ली | दुबे सर, मैम को कभी ना नहीं कह पाते थे इसीलिए अपने हीरो की जगह नाटक में फिक्स हो गई |

"जब मोहल्ले के लड़के 26 जनवरी की प्रभातफेरी लगा रहे थे, 
तब मै दांतों के बीच तीली दबा के बच्चन बन रहा था "


धीरे-धीरे  स्टेज पे चढ़कर बेईज्ज़ती कराने का वक़्त नजदीक आ रहा था | चौधरी सर को A.C वाले कमरे से सख्त निर्देश मिले थे की प्रभातफेरी के टाइम अगर कोई उदंडता करे तो धर के लगा सकते हैं | कॉमर्स वाले दीदी-भैया अब "मेरे देश की धरती सोना उगले ..."  बजा के डांस प्रैक्टिस, शुरू कर चुके थे | स्कूल वालों ने सामने के समोसे वाले को 26 जनवरी का ठीका दे दिया था | सीनियर लड़कों ने स्कूल बंक करके पिक्चर देखने का प्लान बना लिया था और हमारा हीरो धीरे-धीरे बच्चन को सिल रहा था अपनी खाल पर | घर में मम्मी को दहेज़ में मिले सिंगारदान में लगे शीशे के सामने खड़े होकर, एक हाथ कमर पे रख के और दूसरा हवा में करके अपना हीरो भारी आवाज में "हांई" बोलना सीख रहा था |
आज खुश तो बहुत होगे तुम ?

नाटक का आखिरी सीन चल रहा था | अपना हीरो विजय को बिलकुल घोंट चुका था | दुबे सर के edit किये हुए डायलॉग जब हीरो बोलता था तो हाल के आखिरी में बैठे बच्चे और टीचर्स भी तालियाँ पीटते नहीं थकते थे | दुबे सर backstage से नाटक को लाइन by लाइन मिला रहे थे | अब होना कुछ यूँ था की, अपना हीरो तो बुरा वाला विजय बना था जो देश की प्रगति के बीच एक दीवार था | तो उसे टूटना था | एक नकली तलवार से अपने हीरो को चीरा जाना था और फिर धक्का मार के गिरा देना था | दुबे सर ने बोल रखा था की तलवार लगने के बाद 5 तक गिनना और तब तक स्टेज के किनारे की दीवार सहारे लुढ़क जाना | पर शुरू से ही बच्चन के भारी "हांई" तले दबे शशि कपूर को आखिरी में मौका मिला था "मेरे पास माँ है" बोलने का | उसने अपने हीरो को बिलकुल स्टेज के सामने, बीच में कहीं, पेट में तलवार मार दी | हीरो धड़ाम से गिर गया | 'पटाक' की बहुत तेज़ आवाज आई | पूरे हाल में सन्नाटा छा गया | सिर फट गया, सिर फट गया की अफवाह पीछे से उठी और आगे तक बैठे बच्चों के रोंगटे खड़ी कर गयी | दुबे सर ने पर्दा खींचा और हीरो के पास आये और उसका हाल पूछा |
हीरो उवाचः सर बुराई के गिरने की गूँज होनी चाहिये, हुई न गूँज ?

Cut to Present :


आज कुछ 20 साल बाद अपना हीरो अपने  6 साल के बच्चे के स्कूल आया है | Republic Day का function चल रहा है |अपने हीरो का बेटा गाँधी जी बना है  Fancy dress competition में |समोसे की जगह चॉकलेट ने ले ली है |स्लोगन और नारे फ़िल्मी गानों के बीट तले दब गए हैं | एक दिन वाली देशभक्ति की बत्ती बना के स्कूल को रौशन कर दिया गया है  |अपना हीरो  इस शोर में अपने गिरने की गूँज ढूंढ रहा है |



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