Hinduism

वृन्दावन में स्थित निधि वन की रहस्यमयी महिमा | The secret of Nidhivan in Vridavan



बंसी चोर राधा रानी और उनकी सखियाँ :


निधि वन में राधा रानी का भी एक मंदिर हैं जिसमें राधा रानी कृष्ण जी की वंशी चुराए बैठी हैं। इस मंदिर में राधा रानी की मूर्ति के साथ कृष्ण जी की सबसे प्रिय सखी ललिता जी की भी मूर्ति हैं। राधा रानी ने कृष्ण जी की वंशी को क्यों चुराया था ? राधा रानी कृष्ण जी की वंशी को अपनी सौतन के रूप में मानती थी और बंसी के प्रति उनका ऐसा ही व्यहवार था। राधा रानी कृष्ण जी को बोला करती थी आप सदा इसके साथ ही रहते हैं सदा इसको बजाते रहते हैं। राधा रानी कृष्ण जी से शिकायत करते हुए कहती की आपकी इस वंशी की वजह से ही हम बातें नहीं कर पाते हैं।

सखियों के भड़काने पर राधा रानी ने कृष्ण जी की वंशी चुरा ली थी। उनके द्वारा किये गए इस काम में कृष्ण जी की प्रिय सखियो ने भी साथ दिया था। इसी कारण निधि वन में स्थित राधा रानी के इस मंदिर में राधा रानी के साथ ललिता और विशाखा की भी मूर्ति हैं। 

जानते हैं निधि वन में स्थित रंग महल के बारे में :

  निधि वन में स्थित रंग महल के बारे में बोला जाता हैं की आज भी यंहा पर कृष्ण जी राधा रानी के साथ रास रचाने आते हैं। इस निधि वन में ही कृष्ण जी ने राधा रानी और अन्य गोपियों के साथ रास रचाया था। राधा रानी और गोपियों के साथ रचाये गए इस रास को महारास भी कहा जाता हैं।


रंग महल में आज भी माखन मिश्री का प्रसाद और श्रृंगार का सामान रखा जाता हैं। रंग महल में आज तक भी बिछौना बिछाया जाता हैं, एक लौटा पानी एवं नीम की दातुन भी राखी जाती हैं। जब मंदिर के पट खुलते हैं उस समय सारा सामान अस्त व्यस्त मिलता हैं और दातुन चबी हुई मिलती हैं। सारे सामान को देखकर ऐसा प्रतीत होता हैं जैसा रात में कोई रहा हो। 

निधि वन की रहस्यमयी महिमा :


निधिवन के पट संध्या आरती के बाद बन्द कर  दिये जाते हैं और यंहा पर रात्रि में किसी को भी रुकने नहीं दिया जाता हैं। जो लोग इस वन में रास देखने के लिए छिप जाते हैं वो व्यक्ति पागल, गूँगा, बहरा और अँधा हो जाता हैं। कृष्ण जी के परम भक्त पागल बाबा भी कृष्ण जी का रास देखने के लिए रुक गये थे और सुबह को वो बेहोश मिले थे। क्योंकि की वो परम भक्त थे इसलिए उनकी समाधि बनवायी गयी हैं। संध्या के समय कोई भी इस वन की तरफ नहीं देखता हैं। संध्या के समय सभी पशु पक्षी भी वन से चले जाते हैं। 

विशाखा कुण्ड :

कहा जाता हैं जब कृष्ण जी राधा रानी और गोपियों के साथ रास रचा रहे थे तभी एक गोपी विशाखा को प्यास लगी। परन्तु वन में कही पर भी पानी नहीं था। तब विशाखा की प्यास को शांत करने के लिए कृष्णा जी ने अपनी वंशी से एक कुण्ड बनाया जिसमे विशाखा ने पानी पीकर अपनी प्यास को शांत किया था। तभी से इस कुण्ड को विशाखा कुण्ड के नाम से जाना जाता हैं।




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