Hinduism

श्री कृष्ण के सातवें भाई थे बलराम | Lord Balrama was seventh brother of Lord Krishna



कैसे हुआ था बलराम (बलदाऊ) का जन्म ?


बलराम जिनको बलदाऊ भी बोला जाता हैं श्री कृष्ण के सातवें भाई थे। बलराम देवकी और वसुदेव की सातवीं सन्तान थे। माता रोहिणी जिनको सब बलराम की माता के रूप में जानते हैं वास्तविक रूप से उन्होंने बलराम का पालन-पोषण किया था। माता रोहिणी जो की माँ यशोदा की सखी और वसुदेव की पहली पत्नी थी। जिस समय देवकी और वसुदेव कंस की जेल में कैद थे उनसे मिलने रोहिणी आयी थी। उस समय माँ देवकी गर्भवती थी तो माँ देवकी ने अपनी संतान के मृत्यु के भय से अपनी कोख माँ रोहिणी को दे दी थी। उसके बाद रोहिणी माँ यशोदा के घर पर आकर रहने लगी।


बलराम का जन्म माँ यशोदा और नन्दबाबा के घर गोकुल में हुआ था। बलराम को माँ यशोदा नन्दबाबा ने अपने पुत्र की भाँति पाला था। बलराम का बचपन गोकुल की गलियों में श्री कृष्ण के साथ ही बीता था। 

बलदाऊ की श्री कृष्ण के साथ की गयी बाल लीलाएँ -

बलदाऊ और श्री कृष्ण दोनों का बचपन गोकुल में ही बीता था। श्री कृष्ण का रंग सांवरा था और भैया बलदाऊ का रंग गोरा था तो बलराम कन्हैया को चिढ़ाते थे की तू माँ यशोदा का पुत्र नहीं हैं क्योंकि तू काला हैं। बलराम और श्री कृष्ण अन्य ग्वाल बालों के साथ गैया चराने जाते थे।


सब लोग मिलकर भोजन करते थे और कन्हैया की वांसुरी की धुन सुनते थे। जिस समय पर श्री कृष्ण वंसुरी बजाते थे उस समय सभी लोग किसी अलग ही दुनिया में चले जाते थे। उस समय सभी लोग अपने सुख दुःख मोह माया सब कुछ भूल जाते थे। पशु भी वंसुरी की धुन में मगन हो जाते थे। 

माखन चुराने में बलदाऊ भी साथ देते थे -


माखन श्री कृष्ण को सबसे प्रिय था। माखन तो भैया बलदाऊ और उनके अन्य सभी सखाओं को भी प्रिय था। गोकुल में स्थित सभी गोपियों  से श्री कृष्ण और उनके सभी मित्रों ने चोरी की हैं। सभी गोपियाँ श्री कृष्ण और उनकी मण्डली से परेशान थी। गोपियाँ माँ यशोदा से सदा कन्हैया की शिकायत करने आती थी और बोलती थी माँ यशोदा तेरे कन्हैया ने हमारे घर में माखन की चोरी की हैं।


जब गोपियाँ पनघट से पानी भरकर लाती थी तब श्री कृष्ण गोपियों को परेशान करने के लिए उनकी पानी से मटकी को कंकरी मरकर फोड़ देते थे।  

मात्र १६ वर्ष की आयु में छोड़ दिया था गोकुल -


मथुरा नरेश कंस का वध करने के लिए भैया बलदाऊ और श्री कृष्ण ने गोकुल को छोड़ दिया था। कंस ने दोनों भाइयो को मथुरा में लाने के लिए उद्धव को भेज था।
१६ वर्ष की आयु में बलदाऊ और श्री कृष्ण ने कंस के बड़-बड़े पहलवानों के साथ मलयुद्ध करके उनको हराया था। 

कंस के योद्धाओं को हराकर मात्र १६ वर्ष की आयु में विजय प्राप्त की थी। उनको हराने के बाद श्री कृष्ण ने मामा कंस का वध किया था। मामा कंस के वध के बाद श्री कृष्ण ने अपने माता-पिता को उसकी जेल की कैद से मुक्त कराया था।



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