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कलयुग का कवच क्यों कहते हैं रुद्राक्ष को ? पढ़िए यहाँ | What is the significance of Rudraksh ?



*यह आर्टिकल राखी सोनी द्वारा लिखा गया है। 

हमारे पौराणिक कथाओं में रूद्राक्ष का काफी महत्व है। हिन्दी ग्रंथों के अनुसार रूद्राक्ष की उत्पति शिव के नेत्रों से हुई है। इसे धारण करने से व्यक्ति प्रगति के पथ पर अग्रसर हो जाता है। ऐसा कहा जाता है कि रूद्राक्ष व्यक्ति को एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति बुरी शक्तियों से हमेशा बचा रहता है। रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर 21-मुखी तक होते हैं, जिन्हें अलग-अलग प्रयोजन के लिए पहना जाता है। इसलिए रूद्राक्ष को धारण करने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष की सलाह जरूर लेनी चाहिए। किसी भी जगह से रुद्राक्ष को खरीदकर नहीं पहनना चाहिए।

कैसे हुआ रूद्राक्ष का निर्माण ?

रुद्राक्ष एक खास तरह के पेड़ का बीज होता है। ये पेड़ आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में एक खास ऊंचाई पर पाया जाता है।  रूद्राक्ष सिर्फ बुरी शक्तियों से नहीं बचाता है, बल्कि ये भी बताता है कि पानी पीने लायक है या नहीं। रुद्राक्ष को पानी के ऊपर पकड़ कर रखने से अगर वह खुद-ब-खुद घड़ी की दिशा में घूमने लगे, तो इसका मतलब है कि वह पानी पीने लायक है।


अगर पानी जहरीला या हानि पहुंचाने वाला होगा तो रुद्राक्ष घड़ी की दिशा से उलटा घूमेगा। पुराने जमाने में जब साधु संत कई सालों तक जंगलों में रहा करते थे, तो वे रूद्राक्ष की सहायता से ही पता लगाया करते थे तालाब का पानी पीने लायक है या नहीं।

जब भी धारण करें रूद्राक्ष तो ध्यान रखें ये बातें :


रूद्राक्षी को किसी अच्छे मुहूर्त में धारण करना चाहिए। जिस रुद्राक्ष की माला से आप जाप करते हैं उसे कभी धारण नहीं करना चाहिए। इसे अंगूठी में नहीं जड़ाना चाहिए। पूरे नियमों के साथ रूद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर होते हें।  कहा जाता है कि जिन घरों में रुद्राक्ष की पूजा होती है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है। यह भगवान शंकर की प्रिय चीज मानी जाती है। रूद्राक्ष कई मुखी होते हैं। हर रूद्राक्ष की अपनी उपयोगिता होती है।

एकमुखी रुद्राक्ष- 
एकमुखी रुद्राक्ष को शिवजी का ही रूप माना जाता है। इसे धारण करने से हमेशा मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

दोमुखी रुद्राक्ष- 
इसे धारण करने से व्यक्ति की सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण होती है।

तीनमुखी रुद्राक्ष-
जिन लोगों को विद्या प्राप्ति की अभिलाषा है उन्हें तीनमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।

चारमुखी रुद्राक्ष-
जबकि चारमुखी रुद्राक्ष को धारण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पांचमुखी रुद्राक्ष- 
अगर आपके जीवन में एक के बाद एक परेशानी आ रही है तो पांच मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए। इससे सभी समस्याएं हल होती है।

छः मुखी रुद्राक्ष- 
इसे  भगवान कार्तिकेय का रूप माना जाता है।  जो व्यक्ति इस रुद्राक्ष को दाहिनी बांह पर धारण करता है, उसे  े पापों से भी मुक्ति मिल जाती है।

सातमुखी रुद्राक्ष- 
अगर आप धनवान बनना चाहते हैं तो सातमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।

आठमुखी रुद्राक्ष-
जबकि आठमुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति अकाल मृत्यु से शरीर का त्याग नहीं करते हैं। ऐसे लोग पूर्ण आयु जीते हैं।

नौमुखी रुद्राक्ष- 
ये  महाशक्ति के नौ रूपों का प्रतीक है।  ऐसे लोग सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं। समाज में खास पहचान भी मिलतीहै।

दसमुखी रूद्राक्ष-
जबकि दसमुखी रूद्राक्ष व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी करता है।

ग्यारहमुखी रुद्राक्ष-  
जो व्यक्ति इस रुद्राक्ष को धारण करता है, वह हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाता है।

बारहमुखी रुद्राक्ष-
जबकि बारहमुखी रुद्राक्ष धारण करने से बारह आदित्यों की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

तेरहमुखी रुद्राक्ष- 
इस रुद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति भाग्यशाली बन सकता है।

चौदहमुखी रुद्राक्ष- 
इसे धारण करने से पाप से मुक्ति मिलती है। व्यक्ति को पॉजिटिव एनर्जी मिलती है। 



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