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एक मंदिर ऐसा भी, जहाँ माँ लक्ष्मी की प्रतिमा बदलती है रंग | Amazing Temple of Goddess Lakshmi



*यह आर्टिकल राखी सोनी द्वारा लिखा गया है। 


भगवान के चमत्कार के बारे में कई व्यक्तियों ने सुना होगा। इसके अलावा कुछ लोग ऐसे भी होंगे, जिनके साथ ये चमत्कार होते भी है। हमारे देश में ऐसा ही कोई घर होगा, जहां भगवान की मूर्ति न हों। पत्थर की मूर्ति को लोग पूरी श्रद्धा के साथ हमने घर में न सिर्फ रखते हैं , बल्कि पूजते भी है। हम अपने कई लेखों के जरिए दुनिया भर में स्थित कई मंदिरों के चमत्कारों के बारे में बताते आए हैं। जिनका रहस्य वैज्ञानिकों के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं है। किसी मंदिर में तेल से नहीं बल्कि पानी से दीपक जलता है तो किसी में हनुमान रात में भ्रमण करने के लिए आते हैं। इन्हीं अनोखे मंदिर में ऐसा ही एक मंदिर मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित है। इस मंदिर का नाम पचमठा मंदिर है। इस मंदिर में वैसे तो कई देवी-देवता स्थापित है, लेकिन इस मंदिर में मां लक्ष्मी की मूर्ति लोगों के लिए हमेशा से ही खास रही है। इस मूर्ति की खास बात ये हैं कि ये दिन में तीन बार अपने आप रंग बदलती है।

तांत्रिकों के लिए विशेष है ये मंदिर :


मंदिर का निर्माण लगभग 11 सौ वर्ष पूर्व हुआ था। इस मंदिर का र्निमाण गोंडवाना शासन में रानी दुर्गावती के विशेष सेवापति रहे दीवान अधार सिंह के नाम से बने अधारताल तालाब में किया गया था।  कहा जाता है कि ये मंदिर तांत्रिक की पूजा का विशेष साधना केन्द हुआ करता था। एक समय था जब यहां तांत्रिकों का जमावड़ा लगा करता था। मंदिर के अंदरूनी भाग में श्री यंत्र की अनोखी संरचना है। ऐसा कहा जाता है कि सूर्य की पहली किरण मां लक्ष्मी के चरणों में पड़ती है।

तीन बार रंग बदलना :


इस मंदिर में मां लक्ष्मी की अनोखी प्रतिमा है। ये प्रतिमा दिन में तीन बार रंग बदलती है। सुबह सफेद, दोपहर में पीली और शाम को नीली हो जाती है। जहां कुछ भक्त अपने मनोकामना को पूरी करने के लिए मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं, बल्कि कुछ लोग सिर्फ मंदिर की रंग बदलती प्रतिमा को देखने के लिए यहां आते हैं। कुछ सैलानी तो ऐसे होते है, जो सुबह ही मंदिर में आ जाते है औr रात को जाते हैं, ताकि वे मां के बदलते हुए हर रंग को देख सके।

हर मनोकामना होती है पूरी :


ऐसा कहा जाता है जो भी व्यक्ति यहां सात शुक्रवार माथा टेकने आता है, उसकी सभी मनोकामना जरूर पूरी होती है। वैसे तो सालभर ही यहां लोगों का मेला लगा रहता है, लेकिन दीपावली के दिन यहां पैर रखने की जगह नहीं होती है। दूर-दूर से भक्त इस मंदिर में मां लक्ष्मी के दर्शन के लिए आते हैं।  मंदिर के कपाट केवल रात को छोड़ कर हर समय खुले रहते हैं, सिर्फ दीपावली पर पट रात में भी बंद नहीं होते। दीपावली की रात ये मंदिर दीपकों से जगमगा जाता है। दीपावली के दिन यहां विशेष पूजा अर्चना का आयोजन भी किया जाता है।



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