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इस मंदिर में रूकोंगे तो पत्थर के बन जाओंगे | Surprising Temple of Rajasthan



*यह आर्टिकल राखी सोनी द्वारा लिखा गया है। 


राजस्थान अपने ऐतिहासिक इमारतों और मंदिरों की वजह पर्यटकों का हमेशा से ही पसंदीदा राज्य रहा है। यहां कई ऐसे रहस्मय मंदिर और इमारतें हैं, जिनका राज आज भी लोग के लिए एक अनसुलझी पहेली के समान है। ऐसा ही एक मंदिर बाड़मेर में स्थित है। इस मंदिर का नाम किराडू प्राचीन मंदिर हैै। इस मंदिर का निर्माण ग्यारहवीं शताब्दी में हुआ था। इसे राजस्थान का खजुराहों भी कहा जाता है, लेकिन नौ सालों से ये मंदिर वीराना बना हुआ है। यहां आने से लोगों को काफी डर लगता है। दिन के समय तो जब भी लोग यहां आने की हिम्मत कर जाते हैं, लेकिन शाम के समय यहां आना लोगों के लिए नामुकिन होता है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी शख्स सूर्यास्त के बाद यहां रूकता है, वे पत्थर का हो जाता है या फिर गायब हो जाता है।

साधु ने दिया श्राप :


इस मंदिर को एक साधु का श्राप लगा हुआ है। इस वजह से जो भी व्यक्ति इस मंदिर में रात को रूकता है, वे पत्थर का हो जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंरिद में एक साधु अपने शिष्य के साथ रहता था। एक दिने वे भिक्षा मांगने दूसरे शहर में गया। इस मंदिर और अपने शिष्य की देखभाल का जिम्मा साधु ने गांव वालों को दिया, लेकिन गांव वालों ने न तो मंदिर और न ही साधु के शिष्य का ध्यान रखा। बस एक कुम्हारन ही थी जो शिष्य का ध्यान रखती थी। जब साधु वापस लौटा तो उसे गांव वालों पर बहुत गुस्सा आया।  उसने शाप दिया कि जहां के लोगों में दया की भावना न हो वहां जीवन का क्या मतलब, इसलिए यहां के सभी लोग पत्थर के हो जाएं और पूरा शहर तबाह हो जाए। बस तब से ही ये शहर वीरान हो गया है। बताया जाता है कि साधु ने अपने श्राप के बाद कुम्हारिन और अपने शिष्य को वहां से जाने को कहा, लेकिन उन्हें चेतावनी दी कि कि वे जाते समय पीछे मुड़कर न देखें। साधु की इस बात को कुम्हारिन ने नहीं माना और उसनेे पीछे मुड़कर देख लिया। इस वजह से कुम्हारिन भी पत्थर की बन गई। कुम्हारन की वह पत्थर की मूर्ति आज भी यहां मौजूद है, जो श्राप का सच बयान करती है।

मंदिर के बारे में :


यहां पहले पांच मंदिर हुआ करते थे, लेकिन अब सिर्फ विष्णु मंदिर और सोमेश्वर मंदिर ही ठीक हालत में है। सोमेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।  ऐसी   यहां पर पत्थरों पर बनी कलाकृतियां काफी खूबसूरत है। यहां की दीवारों के अप्सरों के कई चित्र भी बने हुए हैं। विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्ति भी इस मंदिर में है।  के अन्य 3 मंदिर हालांकि खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन इनके दर्शन करना भी एक सुखद अनुभव है।



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