Hinduism

एक मंदिर ऐसा भी, जहां हर दिन अपना आकार बढ़ा रहे हैं गणेशजी | Amazing Temple of Lord Ganesh



*यह आर्टिकल राखी सोनी द्वारा लिखा गया है। 


हमारे देश में वैसे तो गणेशजी के अनेक मंदिर स्थित है, जहां उनकी विशाल प्रतिमाएं विराजित हैं, लेकिन आंधप्रदेश के चितूर जिले में स्थित कनिपक्कम गणेशजी का मंदिर न सिर्फ अपने आप में काफी खास है, बल्कि उनकी महिमा भी अपरमपार है। ये कोई साधारण मंदिर नहीं है। हर साल यहां लाखों श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं और अपनी हर समस्या से मुक्ति पाते हैं। दरअसल इस मंदिर की खास बात ये है कि इस मंदिर में विराजित गणेश की मूर्ति का आकार हर दिन लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान अपने बढ़ते आकार से भक्तों की हर समस्याओं को हर लेते हैं।

ऐसा हुआ मंदिर का निर्माण :


इस मंदिर का निर्माण कैसा हुआ, इसके पीछे भी एक कहानी छुपी हुई है। बताया जाता है कि बहुत साल पहले तीन भाई थे, इनमें से एक भाई गूंगा, दूसरा अंधा और तीसरा बहरा था। तीनों भाईयों ने मिलकर एक जमीन का टुकड़ा खरीदा और खेती करने के लिए वहां स्थित एक कुंए को खोदना शुरू किया, ताकि पानी की परेशानी न हो। कुआं जब वे खोद रहे थे, तो  थोड़ी सी खुदाई के बाद पानी निकल आया। इसके बाद एक पत्थर की मूर्ति दिखाई दी। इस पत्थर को जैसे ही हटाया तो खून की धार निकल गई, जिसके प्रभाव से तीनों भाई बिल्कुल ठीक हो गए। बाद में लोगों को इस चमत्कार के बारे में पता चला तो उन्होंने इस मूर्ति को वहां पर स्थापित कर दिया। बताया जाता है कि मंदिर की स्थापना  11वीं सदी में चोल राजा कुलोतुंग चोल प्रथम ने की थी। मंदिर का विस्तार 1336 में विजयनगर साम्राज्य में किया गया।

हर दिन बढ़ता जा रहा है गणेशजी का पेट :

इस मंदिर में जो गणेश जी की मूर्ति है, उसका आकार हर दिन बढ़ता हजा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर दिन पहले के मुकाबले गणेशजी की मूर्ति का रूप काफी विकराल होता जा रहा है। ऐसा कहा जाता है कि अपने बढ़ते पेट के आकार से गणेशजी अपने भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं।

मिलती है सारे पापों से मुक्ति :


ऐसा कहा जाता है कि यहां आने से व्यक्ति के सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस मंदिर में जो भक्त दर्शन के लिए आता है, उसे सबसे पहले मंदिर के समीप स्थित नदी में स्नान करना होता है। स्नान करते समय उसे अपने पापों के लिए क्षमा माँगनी होती है, साथ ही ये प्रण लेना होता है कि वे भविष्य में ऐसे पाप कभी नहीं करेगा। वैसे तो हर दिन यहां भक्त दूर दूर से यहां दर्शन के लिए आते हैं। गणेशजी चर्तुथी के मौके पर यहां भक्तों को पैर रखने की जगह तक नहीं मिल पाती है। जहां कुछ भक्त दर्शन के लिए आते हैं, वहीं कुछ भक्त इस मंदिर की खूबसूरती और चमत्कारी मूर्ति के दर्शन के लिए यहां आते हैं। 



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