Hinduism

यहां होते हैं शिव के त्रिशूल के दर्शन, सावन में लगता है मेला | Everything you want to know about Patanitop



*यह आर्टिकल राखी सोनी द्वारा लिखा गया है।


जल्द ही सावन का महीना शुरू होने वाला है। सावन के महीने में अगर आप शिवजी के त्रिशूल के दर्शन करना चाहते हैं तो निकल जाइए पटनीटॉप की सैर पर। जी हां, यहां पर सुध महादेव मंदिर स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि यहां पर जो त्रिशूल है, वो साक्षात शिवजी का है। ये जगह जम्मू से १२० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां त्रिशूल तीन टुकड़ों में जमीन पर गड़ा हुआ है। इसके पीछे भी एक कथा भी है। जिसका वर्णन पुराणों में किया गया है।

इसलिए शिवजी ने गाड़ा त्रिशूल :


बताया जाता है कि इस मंदिर से कुछ ही दूरी पर माता पार्वति की जन्म भूमि मानतलाई है। कथा के अनुसार माता पार्वती हर दिन इस मंदिर में शिव की भक्ति करने आती थी। एक दिन जब माता पार्वती शिव की भक्ति में लीन थी, तब सुधान्त राक्षस, वहां शिव की भक्ति के लिए आया। जब सुधान्त ने माता पार्वती को वहां पूजन करते देखा तो वो पार्वती से बात करने के लिए उनके समीप जाकर खड़े हो गए।  जैसे ही मां ने अपनी आंखे खोली वो राक्षत को देखकर घबरा गई और जोर से चिल्लाने लगी। उनकी ये चीख जब भोलेनाथ ने सुनी तो उन्होंने अपना त्रिशूल चला दिया।  त्रिशूल आकर सुधांत के सीने में लगा। बाद में शिवजी को लगा उनसे गलती हो गई। वे अपने भक्त को फिर से जीवित करना चाहते थे, लेकिन राक्षस ने मना कर दिया, क्योंकि वे भोलेनाथ के हाथों मरकर मोक्ष चाहते थे। भगवान ने उसकी बात मान ली और उस जगह का नाम सुध महादेव रखा गया है। उन्होंने उस त्रिशूल के तीन टुकड़े करकर वहां गाड़ दिए जो की आज भी वही है।  कुछ लोगों का कहना कि मंदिर परिसर में एक ऐसा स्थान भी है, जहां सुधान्त दानव की अस्थियां रखी हुई है। ये त्रिशूल खुले परिसर में गड़े हुए हैं। यहां आने वाला भक्त इनकी विशेष पूजा अर्चना भी करते हैं। इसके साथ ही, इन त्रिशूल पर जल भी चढ़ाते हैं।

ये भी जगह है खास :

मंदिर परिसर के बाहर पाप नाशनी बाउली (बावड़ी) है। इसमें पहाड़ो से 24 घंटे पानी आता है। इस पानी से स्नान करने से भक्तों के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसलिए जो भी भक्त यहां आता है, वे यहां स्नान जरूर करता है।
इस मंदिर का निर्माण करीब २८०० वर्ष पहले हुआ था। मंदिर परिसर में शिवलिंग, नंदी और शिवजी का पूरा परिवार भी विराजित है।

सावन के महीने में होता है मेला :


वैसे तो इस जगह पर हर साल ही सैलानियों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन सावन के महीने में यहां का नजारा देखने लायक होता है। दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन के  लिए आते हैं। पूरे सावन यहां मेला जैसा नजारा देखा जा सकता है। लोगों का कहना है कि सावन के महीने में इस त्रिशूल से मांगी गई हर मनोकामना जरूर पूरी होती है। 



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