Hinduism

क्या आप सभी जानते हैं शनि देव की नज़रें सदैव ही नीची क्यों रहती हैं । the story of Shani Dev




शनि देव को न्याय का देवता माना जाता हैं। उनके प्रकोप से सभी को डर लगता हैं इसलिए सभी लोग शनि देव को प्रसन्न करते हैं। शनि देव को उनके पिता सूर्य देव ने कभी भी नहीं अपनाया था। इसलिए वो सदैव अपनी माता के साथ ही रहते थे। शनि देव की पूजा शनिवार के दिन होता हैं और एक बात का सदैव स्मरण रखना होता हैं की शनि देव की पूजा सदैव ही सूर्य अस्त होने के बाद होती हैं। 

शनि देव से किया हुआ माता पार्वती का प्रश्न -

एक बार कैलाश पर्वत पर उत्सव मनाया जा रहा था जिसके लिए सभी देवी देवता कैलाश पर्वत पर उपस्थित थे। सभी देवी देवताओ के साथ शनि देव भी कैलाश पर्वत पर गए थे। कैलाश पर्वत पर यह उत्सव माता पार्वती एवं भगवन शिव के पुत्र श्री गणेश के जन्म के उपलक्ष में था। सभी देव देवता माता पारवती और भगवन शिव के पुत्र गणेश जी के दर्शन करने एवं उनको आशीर्वाद देने कैलाश पर्वत पहुंचे थे। 

शनि देव ने कैलाश पर्वत पर आये हुए सभी देवी देवताओं, ऋषि मुनियों को सादर प्रणाम किया परन्तु उन्होंने यह सभी को प्रणाम अपनी नज़रे झुकाकर किया था। उन्होंने एक  अपनी नज़रे ऊपर नहीं की थी। सभी को प्रणाम  शनि देव माता पार्वती और गणेश जी के पास पहुंचे। जंहा पर माता पार्वती अपनी सखियों के बीच में घिरी हुई थी। शनि देव ने माता पार्वती को प्रणाम किया तथा माता पार्वती के पुत्र की अपनी दृष्टि नहीं की 
माता पारवती ने शनि देव से उनकी नज़रे नीचे होने का कारण पूछा और पूछा की तुम मेरे पुत्र को क्यों नहीं देख रहे हो। 

शनि देव का उत्तर माता पार्वती को -


जब माता पार्वती ने शनि देव से प्रश्न किया तो उनका उत्तर देते हुए शनि देव ने उनको पूरी कहानी सुनाते हुए बोला की में सदैव भगवन श्री कृष्ण की भक्ति में लीन रहता हूँ। और मेरा विवाह भी एक ऐसी ही कन्या के साथ हुआ जो सदैव भक्ति में लीन रहती थी। मेरा विवाह मेरे पिता श्री सूर्य देव ने चित्ररथ गन्धर्व की कन्या से हुआ। एक दिन वह ऋतु स्नान करके मेरे पास आयी उस समय में चिंतन में लीं था तथा मुझे सांसारिक बातो का भी कुछ भी ज्ञान नहीं था धीरे धीरे उनका ऋतु कल व्यर्थ जाने लगा। अपना ऋतुकाल व्यर्थ जाते देख उन्होंने मुझे श्राप दे दिया। और श्राप देते हुए बोला की आज से सदैव तुम्हारी दृष्टि नीची ही रहेगी अगर तुमने अपनी दृष्टि किसी पर डाली तो अवशय ही उसका नाश होगा। 

अपनी सारी कहानी सुनाने के बाद शनि देव ने माता पार्वती को बोला की यही कारन हैं सदैव मेरी नज़रे नीची होने का। और में इस नन्हे शिशु पर अपनी दृष्टि डालकर उसका नाश नहीं करना चाहता। 

शनि देव थे श्री कृष्ण के परम भक्त -


शनि देव श्री कृष्ण के परम भक्त थे। वह सदैव भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे। शनि देव भक्ति में इतने ज्यादा लीन रहते थे की उनको बाहरी दुनिया का कोई भी ज्ञान नहीं था। वह तो सदैव सांसारिक बातों से दूर ही रहते थे। शनि देव का मानना था की सभी के कर्मों का फल उनके द्वारा किये गए कार्यों से मिलता हैं। 



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